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वैभवशाली उमेद पैलेस (वेडिंग डेस्टिनेशन) जोधपुर.........

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जोधपुर को राजस्थान का दिल कहा जाता है | इस राज्य की स्थापना राव जोधा ने 14वी शताब्दी में की थी , लेकिन आज भी यह शहर राजा राजवाडो की विरासत को बड़ी खूबसूरती से अपने में सहेजे हुए है | इसी शहर में उमेद भवन है , जो देश दुनिया में वेडिंग डेस्टिनेशन के तौर पर काफी लोकप्रिय है ........... जोधपुर में कई ऐसे किले , महल और मंदिर है , जो जोधपुर की गौरवशाली इतिहास की पूरी कहानी बयां करते है | इन्ही महलों में एक है उमेद भवन , जिसका निर्माण रजा उमेद सिंह ने वर्ष 1943 में कराया था | उन्ही के नाम पर इस महल को उमेद भवन कहा जाता है | करीब 26  एकड़ में फैले इस पैलेस को तराशे हुए पीले और सुनहरे रिंग के पथरो से बनाया गया है | उमेद भवन बड़े ही राजसी अंदाज में राजस्थान के धरोहर को समेटे हुए है | बेजोड़ कारीगिरी और नक्काशी इस महल की शोभा बढाती है | शाही शानो – शौकत से भरपूर इस पलके का रायल लुक पर्यटकों को काफी आकर्षित करता है और इसी वजह से जो लोग जोधपुर घुमने आते है , वे यहाँ आये बिना नहीं रह पाते है | उमेद भवन के एक हिस्से को मुजियम और दुसरे हिस्से को हेरिटेज होटल बनाया गया है | इस महल में वास्तुकला ...

हमारे अन्नदाता पाई पाई और दाने – दाने का मोहताज़ है .......

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हमारे अन्नदाता पाई पाई और दाने – दाने का मोहताज़ है | किसी के पास जमीं नहीं है तो किसी के सर पर छत नहीं मयस्सर है | महिलाये आज भी दोयम जिंदगी जीने को अभिशप्त है | कुल मिलकर ग्रामीण भारत की तस्वीर बहुत भयावह है | ऐसे में सवाल यह उठता है की आखिर इस स्तिथि की वजह क्या रहि ? क्या शहरों के गांवो के बिच की खाई इस दौरान निर्बाध रूप से चौड़ी होती गई ? क्या हमारी नीतिया, योजनाये और राजनितिक इच्छा शक्ति किसान और खेती का भला नहीं कर पाए जिसके वे हकदार थे |        24.39 करोड़  – देश के कुल परिवारों के संख्या 17.91 करोड़ – गांवो में रहने वाले परिवारों की संख्या   नीतियों का झुकाव - किसी भी अर्थव्यवस्था में ग्रामीण और शहरी क्षेत्र आर्थिक , वित्तीय  और सामाजिक रूप से आपस में गुंथे होते है | आदर्श स्तिथि तो यह होती है कि संसाधनों और सेवाओ का दोनों क्षेत्रो में संतुलन स्थापित होना चाहिए | दुर्भाग्य से भारत और चीन जैसे विकासशील देशो में यह विडंबना दिखती है | इन देशो में तेज़ गति से उद्योगीकरण में अपने ग्रामीण क्षेत्र के अतिरिक्त श्रम और संस...

अब तो छोडो फ़ास्ट फूड्स .....|| क्या वास्तव में हम अपनी जीवन शैली को लेकर जागरूक है ||

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यह कहना गलत नहीं होगा की हमारा भोजन और जीवन शैली का सीधा असर हमारी मानसिक स्तिथि और स्वस्थ पर पड़ता है | मधुमेह , कोलेस्ट्राल और उच्च रक्तचाप जैसी बीमारियों के मामले पहले जहा लगभग 40 वर्ष की उम्र के बाद सामने आते है | वाही आज 25 से 30 वर्ष की उम्र वाले लोग इन बीमारियों से ग्रस्त हो रहे है | यह बात हमे सोचने पर मजबूर करती है  कि क्या वास्तव में हम अपनी जीवन शैली को लेकर जागरूक हो रहे है| खानपान में  बदलाव  - देश पिछले कुछ दशको में लोगो की खानपान की प्रवृतियो  में काफी बदलाव आया है | भारतीयों  की खानपान की आदतों पर कुछ हद तक धार्मिक मान्यताओ का प्रभाव था , परन्तु अब आहार धीरे-धीरे सुविधा  पर आधारित होता जा रहा है | सुविधाजनक भोजन जहां बनाने में  आसान और स्वादिस्ट होता है| वही अब यह एक फैशन भी बनता जा रहा है | समय की कमी और मानसिक तनाव सबसे आम बहाना है  इन सुविधाजनक खाद्य पदार्थो के सेवन करने का | आजकल चिप्स , कोल्ड ड्रिंक्स , बिस्किट्स , पिज़्ज़ा , बर्गर , नुडल्स , चौमिंग और समोसा बहुत कम उम्र से ही लोगो के रोजमर्रा के आहार का हिस्सा बन ...

आ अब लौट चले || जब स्मृति में कौंधता है अपना गाँव , अपने लोग ..||

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सब कुछ मिला है शहर में | अच्छी शिक्षा , अच्छा खाना , अच्छा पहनावा और बेहतर जिंदगी , पर साथ ही है कुछ छुट जाने की कसक भी | अपनी मिटटी , अपनी जुडो से दूर होने की यह कसक और टीसती है , जब स्मृति में कौंधता है अपना गाँव , अपने लोग ........... बारिश में भर जाते है नहर , पोखर, तालाब | इनमे एक साथ नहाते हुए बच्चे , बकरिया और भैस ,धुल में सने पैर लिए चौराहे या बैलगाड़ी पर सुस्ताते ग्रामीण ........ खेतो में उपलों पर थापी रोटी के साथ प्याज खाते लोग .... एक भीनी सी खुशबु  फैली होती है चारो ओर ......| गाँव को याद करके सहसा ऐसी तस्वीरे जेहन में तैरने लगती है |एक जैसी सुबह  , एक तरह की शाम और एक रस होती  जा रही शहरी जिंदगी में नवरंग भरती  है ये तस्वीरे | ऊची -ऊची इमारतो , फ्लेट्स और शहर में बने आलिशान मकानों में वैसे जुड़ नहीं पाते हम , जैसा जुडाव होता है सालो से खड़े अपनी मिटटी , अपनी जमीं पर बने टूटे , जर्जर हो चुके दो कमरों वाले घर से |

तत्काल कर सकते है 50 दशो की यात्रा || तत्काल वीजा आन एराइवल की सुविधा ||

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भारतीयों के दुसरे देशो में आने जाने की संख्या में वृद्धि हो रही है | इसको देखते हुए 50 से अधिक देशो ने भारतीय पासपोर्ट धारको को तत्काल वीजा आन एराइवल की सुविधा प्रदान कर दी है | जिससे भारतीयों को इन देशो में आने - जाने में परेशानी न हो | अधिकतर देश 14 से 30 दिन के लिए वीजा आन एराइवल की सुविधा देते है | इस सुविधा के बदले कुछ शुल्क देने होते है , यह हर देश के हिसाब से अलग अलग है | एशिया महाद्वीप में कम्बोडिया , श्रीलंका , थाईलैंड , हांगकांग , मकाउ , इंडोनेशिया , म्यामांर , वियतनाम, मालदीव , जार्डन , तिमोर , लाओस , अजरबैजान , क्रिगिस्तान , तजाकिस्तान और तुर्क्मेनिग्स्तान भारतीय को वीजा आन एरावल की सुविधा देते है | अफ्रीका में मारीशस , सेशल्स , इजिप्ट , केन्या , लाइबेरिया , तंजानिया , इथोपिया , मेडागास्कर , केप , गियाना , बिसायु , केमोरोस , टोगो , कैमरून , इरिटिया , मोजाम्बिक , उगांडा , गैबून , घाना और माली , दक्षिण अमेरिका में बोलिविया एंव गुयाना उत्तरी अमेरिका में अल सल्वाडोर , , सेंट लुसीया , जमैका , सेंट किट्स एंव नेविस , सेंट विसेंट और ट्रिनिडाड एंव टोबेगो , युरोपे में अलबानिया...

नई राहे बना रही है सोशल मीडिया मार्केटिंग (Social Media Marketing)

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लोकप्रियता बढानें का तरीका - इस मार्केटिंग में सिर्फ उत्पादों को लोकप्रियता बढ़ाना ही मकसद नहीं , बल्कि कई नजरियों  से भी लोग इसका इस्तेमाल कर रहे है | उदाहरण के लिए 2008 में अमेरिकी राष्ट्रपति के चुनाव में बराक ओबामा ने ट्विटर और फेसबुक का जमकर इस्तेमाल किया था और इससे उनकी लोकप्रियता में काफी इजाफा हुआ था | समय समय पर उनके सोशल नेटवर्किंग प्रोफाइल पेजों को अपडेट किया गया और वे लोगो से सीधे जुड़े रहे | इसी का इस्तेमाल पिछले आम  चुनाव में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी किया था , जिससे सोशल साइट्स पर उनकी लोकप्रियता बढ़ी थी | कहाँ  कहाँ  होती है जरुरत  -सोशल मीडिया मार्केटिंग की ....           ट्विटर : - ट्विटर कंपनियों को अपने उत्पादों को प्रमोट करने के लिए 140 करैक्टर की सीमा देती है , जिसमे छोटा ट्विट लिखा होता है | यह ट्विट सीधे तौर पर उस उत्पाद की वेबसाइट , फेसबुक प्रोफाइल , फोटो , विडियो आदि से जुड़ा  होता है | हालाँकि ट्विटर ने अब शब्द - सीमा बड़ा  कर अधिकतम 1000 करैक्टर कर दी है |       यु-ट...

शह -मात का खेल (Kazakhstan,Kyrgyzstan, Tajikistan, Turkmenistan, and Uzbekistan )

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सोवियत संघ  के विघटन के बाद पहली बार नरेन्द्र मोदी  बतौर भारतीय प्रधानमंत्री पांचो मध्य एशियाई देशो की यात्रा पर गए है (  Kazakhstan , Kyrgyzstan ,  Tajikistan ,  Turkmenistan , and  Uzbekistan  ) इससे पहले जून , 1955 में पंडित जवाहरलाल नेहरु इन जगहों पर गए थे |  तब ये देश तत्कालीन सोवियत संघ के हिस्सा थे | नेहरू ने ट्रेन से 10 दिनों में इन जगहों का भ्रमण किया था | इन देशो के अकूत तेल -गैस भंडार पर चीन की चाल के चलते भारत इस क्षेत्र में अपनी दोस्ती को बढाकर चीन आगे नहीं निकलने देना चाहता |